Friday, 22 March 2013

हम देंगें





खामोशियों को , अपनी ज़ुबान हम देंगें ,
दुखते जहां को , खुशियों का सामान हम देंगे ,

हम वो नहीं जो डर के छुपा लें अपने तर्कश को ,
जलते तीरों को , तानी कमान हम देंगे , 

चिल्लाते रहे तुम , कभी ख़ुदा न मिला , 
कल से मस्जिद से पहली अज़ान हम देंगे , 

हौसलों को दर-ब-दर भटकने को किया मजबूर , 
इनको मज़बूत औ पुख्ता मकान हम देंगे , 

धूप में झुलसे , भटकते राही को , 
एक लम्हा ठहरने को वितान हम देंगे , 

बहुत अधूरे हो ले कर अपने हिस्से की ज़मीं , 
पूरे हो जाओगे जब आसमान हम देंगें , 

परखने चले हो आज हमारा दीन-ओ-ईमान , 
घबराता कौन है , खुल के इम्तिहान हम देंगें , 

खामोशियों को , अपनी ज़ुबान हम देंगें , 
दुखते जहां को , खुशियों का सामान हम देंगे , 
"शैली

Wednesday, 27 February 2013

क्षितिज का कोना






दूर जहां मिलते हैं धरा और गगन ,
उस क्षितिज के उजालों और अंधेरों में ,
एक कोना मेरा भी है ....
स्वप्न नगरी में उड़ते हैं कितने ही ख़्वाब ,
उन में एक,
सपना सलोना मेरा भी है ....
कहते हैं हर एक रात की होती है एक सुबह ,
जागती प्रतीक्षारत आँखों को ,
एक सवेरा मेरा भी है ....
ज़मीन पर कितने घरौंदे और जाने कितने मकां ,
इन घरों में ,
एक रैन बसेरा मेरा भी है .....
बस चाहिए थोड़ी ज़मीं और ज़रा सा आसमां ,
फिर तो कहने को ,
सारा जहां मेरा ही है ....
"शैली"

Monday, 25 February 2013

होली



सीस धरो तुम्हरे चरनन में ,

अब छोड़ देयो बनवारी ,

भीज गयी मोरी धानी चुनर और ,

भीजी मोरी सारी ,

मोकों काय रंगत हो कान्हा ,

बे तो , सखियन ने दी गारी ,

मैं तो तुम्हरी जनम जनम तों ,

सबहूँ ते तुमकों प्यारी ....

तज दये अबिर , गुलाल ,

पिचकारी हू भू पै डारी ,

रंग रंगी मैं तो तुम्हरे ही ,

प्रेम रस में भीजी तिहारी ...

चातक , मोर , पपीहा बोलें बन में ,

टेसूअन ने ,मादक गंध पसारी ,

फूल रही सरसों खेतन में ,

मंद मंद हंसत जाये सुकुमारी ,

गारी देत जात मन मन में ,

भरसक करत चिरौरी ,

बिनती सुनत कान्हा हंस दीन्हो ,

स्याम रंग दीन्ही बांकी गोरी ,

सब रंग रंगे बाके ही रंग में ,

ऐसी खेली होरी .......


"शैली"